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Allama Iqbal Shayari ( अल्लामा इक़बाल की शायरी )

Allama iqbal shayari in hindi



फूल की पती से कट सकता है हीरे का जिगर
मर्दे नादाँ पर कलाम-ऐ-नरम-ऐ-नाज़ुक बेअसर

Nahi Hai Na Umeed Iqbal Apni Kisht-e Weran Se
Zara Nam Ho Tu Ye Matti Bahut Zarkhez Hai Saqi

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा

Sare jahan se achcha Hindustan humara
Hum bulbulen hai iski, yah gulsita humara

Islamic shayari by allama iqbal in urdu



देख कैसी क़यामत सी बरपा हुई है आशियानों पर इक़बाल
जो लहू से तामीर हुए थे , पानी से बह गए

Mojon Ke Tapash Kia Hai Faqt Zoq-e Talab Hai
Pinhan Jo Sadaf Main Hain Wo Dolat Hai Khuda Dad

खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तकदीर से पहले
खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा* क्या है

Khudi ko kar buland itna ki har taqdir se pahle
Khuda bande se poonche bata teri raza kya hai

Allama iqbal 2 line shayari


अमल से ज़िन्दगी बनती है , जन्नत भी जहनुम भी
यह कहा की अपनी फितरत में न नूरी है न नारी है

Masjid Tu Bna Di Shab Bhar Main Aeman Ki Hararat Walon Ne
Man Apna Purana Papi Hai Barson Main Namazi Ban Na Saka

जफा* जो इश्क में होती है वह जफा ही नहीं,
सितम न हो तो मुहब्बत में कुछ मजा ही नहीं

Jafa jo ishq mein hoti hai wah zafa hi nahin
Sitam na ho to muhabbat mein kuchh maza hi nahin

Shayari of allama iqbal


पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात
तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा

Parwane Ko Chiragh Hai Bulbul Ko Phol Bas
Sadeeq Ke Liye Hai Khuda Ka Rasool Bas

ढूंढता रहता हूं ऐ ‘इकबाल’ अपने आप को,
आप ही गोया मुसाफिर, आप ही मंजिल हूं मैं।

Allama iqbal poetry in urdu



Doondta rahta hoon ae ‘Iqbal’ apne aap ko
Aap hi goya musafir, aap hi manjil hoon main

इक़रार -ऐ-मुहब्बत ऐहदे-ऐ.वफ़ा सब झूठी सच्ची बातें हैं “इक़बाल”
हर शख्स खुदी की मस्ती में बस अपने खातिर जीता है

Ramzan shayari by allama iqbal



Ghuza Aoqat Kar Leta Hai Ye Koh-o Bayaban Main
Ke Shaheen Ke Liye Zillat Hai Kar-e-Aashian Bandi

दिल की बस्ती अजीब बस्ती है,
लूटने वाले को तरसती है।

Dil ki basti ajeeb hai
Lootne waale ko tarsati hai

इश्क़ क़ातिल से भी मक़तूल से हमदर्दी भी
यह बता किस से मुहब्बत की जज़ा मांगेगा
सजदा ख़ालिक़ को भी इबलीस से याराना भी
हसर में किस से अक़ीदत का सिला मांगेगा

Agar lahu hai badan main to khof hai na haras
Agar lahu hai badan main to dil hai be waswas
Jisey mila ye mtan-giran baha is ko
Na seem-o-zer se muhabat hai na gham-e-iflas

Allama iqbal shayari



मिटा दे अपनी हस्ती को गर कुछ मर्तबा* चाहिए
कि दाना खाक में मिलकर, गुले-गुलजार होता है

Mita de apni hasti ko gar kuchh martba chaahiye
Ki daana khaak meinmilkar, gule-gulzaar hota hai

सौदागरी नहीं , यह इबादत खुदा की है
ऐ बेखबर ! जज़ा की तमन्ना भी छोड़ दे

मुझे रोकेगा तू ऐ नाखुदा* क्या गर्क* होने से
कि जिसे डूबना हो, डूब जाते हैं सफीनों* में

Mujhe rokega tu ae nakhuda kya gark hone se
Ki jise doobna ho, doob jaate hai safeenon mein

Allama iqbal islamic shayari



उम्र भर तेरी मोहब्बत मेरी खिदमत रही
मैं तेरी खिदमत के क़ाबिल जब हुआ तो तू चल बसी

हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर* पैदा

Hazaron saal nargis apni benoori pe roti hai
Badi mushkil se hota hai chaman mein deedawar paida

Allama iqbal ki shayari



किसी की याद ने ज़ख्मो से भर दिया सीना
हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी

खुदा के बन्दे तो हैं हजारों बनो में फिरते हैं मारे-मारे
मैं उसका बन्दा बनूंगा जिसको खुदा के बन्दों से प्यार होगा

Khuda ke bande to hain hazaron bano mein firte hai mare-mare
MAin uska banda banooga jisko khuda ke bandon se pyaar hoga

Allama iqbal shayari on imam hussain



और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

सितारों से आगे जहां और भी हैं
अभी इश्क के इम्तिहां और भी हैं

Sitaaron se aage jahan aur bhi hain
Abhi ishq ke imtihan aur bhi hai

Allama iqbal shayari on karbala



बड़े इसरार पोशीदा हैं इस तनहा पसंदी में .
यह मत समझो के दीवाने जहनदीदा नहीं होते .
ताजुब क्या अगर इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है
बहुत से लोग दुनिया में पसंददीदा नहीं होते .

सख्तियां करता हूं दिल पर गैर से गाफिल* हूं मैं
हाय क्या अच्छी कही जालिम हूं, जाहिल हूं मैं

Allama iqbal ki shayari



Sakhtiyan karta hoon dil par gair se gaafil hoon main
Haay kya achchi kahi zaalim hoon, zaahil hoon main

तेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता हूँ
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हूँ , सज़ा चाहता हूँ

Allama iqbal shayari in hindi



साकी की मुहब्बत में दिल साफ हुआ इतना
जब सर को झुकाता हूं शीशा नजर आता है

Saaqi ki muhabbat mein dil saaf hua itna
Jab sar ko jhukaata hoon sheesha nazar aata hai

मुमकिन है कि तू जिसको समझता है बहारां
औरों की निगाहों में वो मौसम हो खिजां का

Allama iqbal shayari hindi



Mumkin hai ki tu jiskon samjhta hai bhaaran
Auron ki nigaahon mein wo mausam ho khijan ka

ज़माना आया है बे – हिजबी का , आम दीदार -ऐ -यार होगा ;
सकूत था पर्देदार जिसका वो राज़ अब आशकार होगा .

Allama iqbal shayari in english



इस दौर की ज़ुल्मत में हर कल्बे परेशान को
वो दाग़े मुहब्बत दे जो चाँद को शर्मा दे

तेरी दुआ से कज़ा* तो बदल नहीं सकती
मगर है इस से यह मुमकिन की तू बदल जाये
तेरी दुआ है की हो तेरी आरज़ू पूरी
मेरी दुआ है तेरी आरज़ू बदल जाये

Teri dua se kaza to badal nahi sakti
Magar hai is se yeh mumkin ki tu badal jaye
Teri dua hai ki ho teri Aarzoo poori
Meri dua hai teri Aarzoo badle jaye.

Allama iqbal poetry for students



मिटा दे अपनी हस्ती को अगर खुद मुर्तबा चाहे
की दाना खाक में मिलकर गुल ओ गुलज़ार बनता है

हंसी आती है मुझे हसरते इंसान पर
गुनाह करता है खुद और लानत भेजता है सैतान पर

आज फिर तेरी याद मुश्किल बना देगी
सोने से काबिल ही मुझे रुला देगी
आँख लग गई भले से तो डर है
कोई आवाज़ फिर मुझे जगा देगी

Allama iqbal shayari in english



किसी के इश्क़ के हम-ओ-ख्याल थे हम भी कभी
गुजरे ज़माने में बहुत बा-कमाल थे हम भी कभी

ढूंढ़ता फिरता हूँ ऐ इक़बाल अपने आप को
आप ही गोया मुसाफिर आप ही मंज़िल हूँ मैं

उसकी फितरत परिंदों सी थी मेरा मिज़ाज दरख़्तों जैसा
उसे उड़ जाना था और मुझे कायम ही रहना था

Allama iqbal shayari in urdu



किसी की याद ने जख्मों से भर दिया है सीना
अब हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी

मुझ सा कोई शख्स नादान भी न हो
करे जो इश्क़ कहता है नुकसान भी न हो

फूल चाहे थे मगर हाथ में आए पत्थर ,
हम ने आगोश- ऐ-मोहब्बत में सुलाये पत्थर ..

Allama iqbal shayari in hindi pdf



उठा कर चूम ली हैं चंद मुरझाई हुई कलियाँ ,
न तुम ए तो यूं जश्न -ऐ -बहाराँ कर लिया मैने ..

खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता ,
यह चीज़ वो है जो देखी कहीं कहीं मैंने ..

Allama iqbal shayari in urdu



जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है ,
उन का हर ऐब भी ज़माने को हुनर लगता है …

तेरी बन्दा परवारी से मेरे दिन गुज़र रहे हैं
न गिला है दोस्तों का , न शिकायत -ऐ -ज़माना

और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

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